बलिया : SIR पर सपा नेता ने दिया यह बड़ा बयान,एसआईआर से वोट कटाने की साजिश
बांसडीह,बलिया। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता राम गोविंद चौधरी ने बेहद तीखे शब्दों में सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि एसआईआर के नाम पर विपक्षी समर्थकों, खासकर पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक और वंचित तबकों का वोट जानबूझकर काटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया लोकतंत्र की बुनियादी आत्मा पर आघात करने वाली है। चौधरी ने प्रेस रिलीज में कहा कि सरकार वोटर लिस्ट संशोधन को “तकनीकी अभियान” बताकर पेश कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है।मतदाता सूची से नाम हटाना सर्वथा गलत और गैरकानूनी तरीका है। सरकार और आयोग चुनावी लाभ के लिए विपक्षियों की वोट शक्ति खत्म करने में जुटे हैं। यह सिर्फ निंदनीय नहीं, लोकतंत्र के खिलाफ षड्यंत्र है। उन्होंने कहा कि जिन समुदायों को दशकों से राजनीतिक रूप से पीछे रखा गया, अब उन्हीं समुदायों पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों और गरीब तबकों को चुनावी समीकरणों में कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि कई बूथों पर बिना जांच के, बिना सत्यापन के, लोगों के नाम काटे जा रहे हैं और जागरूक मतदाताओं को इसका पता भी नहीं चल पा रहा।
चौधरी ने कहा कि मतदाता सूची सिर्फ कागज़ का दस्तावेज नहीं, बल्कि हर नागरिक के संवैधानिक अधिकार का आधार है। इस पर कोई भी मनमानी सीधे-सीधे जनता की आवाज़ दबाने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एसआईआर अभियान को दबाव और डर के माहौल में चला रही है, जिससे असल लाभार्थियों को ही नुकसान हो रहा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार ने इस घिनौने काम को नहीं रोका तो समाजवादी पार्टी गरीबों, पिछड़ों, दलितों, अल्पसंख्यकों और अन्य समुदायों के साथ सड़क पर उतरकर बड़ा आंदोलन करेगी। लोकतंत्र को बचाने के लिए संघर्ष करने से हम पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि एसआईआर का वास्तविक उद्देश्य मतदाता सूची को पारदर्शी बनाना है, लेकिन वर्तमान में यह अभियान पारदर्शिता से दूर, पक्षपातपूर्ण और राजनीतिक मंशाओं से प्रेरित दिखाई दे रहा है। चौधरी ने सरकार से मांग की कि एसआईआर प्रक्रिया की समीक्षा कराई जाए, गलत तरीके से काटे गए नामों को तत्काल बहाल किया जाए और बीएलओ तथा संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाए।
