शारदीय नवरात्रि का आगाज आज से
हालांकि श्री पांडेय ने बताया कि कलश स्थापना का अभिजीत मुहूर्त दिन में 11.36 से लेकर12.24 तक है। अभिजीत मुहूर्त नवरात्र में कलश स्थापना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। उन्होंने बताया कि शक्ति स्वरूपा जगत जननी के नौ स्वरूपों के लिए निर्धारित नौ दिन की नवरात्रि सनातन धर्म के प्रधानों के लिए शक्ति और ऊर्जा का स्रोत मानी जाती है।
बकौल श्री पांडेय शारदीय नवरात्रि में कलश स्थापना कर आदि शक्ति की पूजा अर्चना करने मात्र से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।बतया कि स्वयं भगवती कहती है कि शरत्काले महापूजा क्रियते या च वार्षकी।तस्यां ममैतन्माहात्म्यं श्रुत्वा भक्ति समन्वितः।।सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतांवितः।मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः।। अर्थात शरद ऋतु में जो भक्त श्रद्धा भक्ति के मेरी पूजा करते है उन्हें सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
श्री पांडेय ने बताया कि नवरात्रि में व्रत रख कर सात्विक वृत्ति से कलश सहित देवी की स्थापना करें। नित्य विधि सहित दूध, दही, घी, मधु, पंचामृत, इत्र, जल, वस्त्र, श्रृंगार, फूल माला, नैवेद्य, पान, धुप-दीप से पूजा कर अंत में आरती और क्षमा प्रार्थना करें।इसी क्रम में नित्य श्रीदुर्गासप्तशती का पाठ करें या योग्य ब्राह्मण द्वारा कराएं।
बताया की श्रीदुर्गासप्तशती की पाठ विधि में नौ दिनों तक अखण्ड दीप की व्यवस्था होनी चहिये। इसके बाद देवी प्रतिमा की अंगन्यास, करन्यास करना चहिये। गौरी, गणेश, नवग्रह पूजन, पुण्याहवाचन, आसनशुद्धि, आचमन, प्राणायम, शिखाबन्धन, तिलक, पवित्रिधारण, पुस्तक पूजन, योनिमुद्रा प्रदर्शन, संकल्प, शापोद्धार, उत्कीलन, मृतसंजीवन विद्या, के पश्चात पाठ आरम्भ करें। श्रीदुर्गासप्तशती के पाठ में कवच अर्गला कीलक के पश्चात सभी तेरहों अध्याय का पाठ करें। इसके बाद तन्त्रोक्त देवी सूक्त और तीनों रहस्यों का पाठ करें। श्री पांडेय ने बताया कि सभी तेरहों अध्याय का पाठ करने का समय न मिलने पर मध्यम चरित (2, 3, 4 अध्याय) का पाठ कर सकते है।
बताया की देवी के आगमन के लिए सप्तमी तिथि का विचार किया जाता है। इस वर्ष शरद नवरात्र में सप्तमी तिथि शनिवार को है। इसलिए देवी का आगमन 'तुरङ्ग' अर्थात घोड़े पर होगा।उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि नवमी सोमवार को 3.05 बजे तक है।यहीं कारण कि देवी का प्रस्थान 'महिष ' अर्थात भैंसे पर है।

