बलिया :हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार और तहसील प्रशासन से जवाब मांगने के बाद बांसडीह में जाति प्रमाण पत्र जारी, श्रेय को लेकर छिड़ी बहस,समाज में खुशी का माहौल - Ballia Breaking
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    बलिया :हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार और तहसील प्रशासन से जवाब मांगने के बाद बांसडीह में जाति प्रमाण पत्र जारी, श्रेय को लेकर छिड़ी बहस,समाज में खुशी का माहौल

     


    फोटो - सोसल मीडिया पर वायरल प्रमाण पत्र की फोटो

    बांसडीह, बलिया। स्थानीय तहसील क्षेत्र में गोंड समाज के अनुसूचित जनजाति (ST) जाति प्रमाण पत्र को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब नया मोड़ लेता दिख रहा है। वर्षों से धरना-प्रदर्शन और विरोध कर रहे समाज के लोगों को मंगलवार को बड़ी राहत मिली, जब तहसील प्रशासन ने पिंडहारा निवासी गीता देवी पत्नी विनोद कुमार, उनके पति विनोद कुमार पुत्र व उनके दो बच्चों में अनामिका पुत्री विनोद कुमार,कृष्ण कुमार पुत्र विनोद कुमार सहित एक ही परिवार के चार लोगों को महज दो घंटे के भीतर जाति प्रमाण पत्र जारी कर दिया।

    बताया जाता है कि सोमवार को इस मुद्दे को लेकर स्थानीय विधायक केतकी सिंह के आवास पर तहसील प्रशासन और गोंड समाज के लोगों के बीच वार्ता हुई, जिसमें प्रमाण पत्र जारी करने पर सहमति बनी। इसके बाद मंगलवार को आवेदन कराए गए और उसी दिन प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए।

    इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा इसका श्रेय विधायक को दिया जा रहा है। हालांकि, क्षेत्र के कई प्रबुद्ध लोगों ने इस पर सवाल उठाते हुए इसे हाईकोर्ट के दबाव का परिणाम बताया है।

    दरअसल, प्रयागराज हाईकोर्ट में दाखिल एक याचिका के आदेश की प्रति सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस आदेश में कोर्ट ने तहसील प्रशासन व राज्य सरकार से पूछा है कि पूर्व में जारी गोंड जाति प्रमाण पत्र को किस आधार पर निरस्त किया गया और नए आवेदन को “साक्ष्य के अभाव” में क्यों खारिज किया गया। लोगों का कहना है कि मामला हाईकोर्ट पहुंचने के बाद ही प्रशासन हरकत में आया और आनन-फानन में प्रमाण पत्र जारी किए गए। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और श्रेय को लेकर बहस जारी है।

    क्या है पूरा मामला

    तहसील क्षेत्र के पिंडहारा निवासी गीता देवी पत्नी विनोद कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया था कि वर्ष 2008 में उन्हें अनुसूचित जनजाति (गोंड) का जाति प्रमाण पत्र जारी हुआ था। बाद में उसी जाति में विवाह के बावजूद तहसीलदार ने 22 जनवरी 2026 को उनके नए प्रमाण पत्र के आवेदन को “साक्ष्य के अभाव” में खारिज कर दिया।

    याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रयागराज हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार से जवाब मांगा और टिप्पणी की कि जब अभिलेखों में परिवार के अन्य सदस्यों के प्रमाण पत्र मौजूद हैं तो “साक्ष्य के अभाव” का आधार स्पष्ट किया जाए। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अनावश्यक विलंब पर प्रतिकूल धारणा बन सकती है।मामले की अगली सुनवाई 9 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है।


    फ़ोटो - वायरल आदेश

    हाईकोर्ट का आदेश (संक्षेप में)

    • वर्ष 2008 में जारी जाति प्रमाण पत्र का उल्लेख
    • 2026 में तहसीलदार द्वारा आवेदन खारिज
    • “साक्ष्य के अभाव” पर कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण
    • परिवार के अन्य सदस्यों के प्रमाण पत्र पर उठाया सवाल
    • राज्य सरकार/तहसील प्रशासन को जवाब दाखिल करने का निर्देश
    • अगली सुनवाई 9 अप्रैल 2026 तय

     तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली की चहुंओर चर्चा

    बांसडीह तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। आमतौर पर जनसेवा केंद्र पर आवेदन करने के बाद आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र जारी होने में 7 से 15 दिन का समय लगता है, लेकिन यहां मात्र दो घंटे में ही एक ही परिवार के चार लोगों को जाति प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया।

    इस तेजी को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोग इसे स्थानीय विधायक केतकी सिंह के प्रयासों का परिणाम मान रहे हैं, तो कुछ इसे छात्र संघर्ष समिति व गोंड समाज के लंबे आंदोलन का असर बता रहे हैं। वहीं कई लोग इसे प्रयागराजन द्वारा राज्य सरकार और तहसील प्रशासन से जवाब तलब किए जाने के बाद की कार्रवाई मान रहे हैं। हालांकि, कारण चाहे जो भी रहा हो, गोंड समाज में जाति प्रमाण पत्र जारी होने से खुशी का माहौल है।


    क्या कहा पूर्वांचल छात्र संघर्ष समिति के संयोजक ने

    मंगलवार की देर शाम स्थानीय तहसील द्वारा गोंड समाज के अभ्यर्थियों के लिए अनुसूचित जनजाति (ST) जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाने पर क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
    पूर्वांचल छात्र संघर्ष समिति के संयोजक नागेंद्र बहादुर सिंह ने अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि समिति और गोंड समाज के लंबे संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने बताया कि वर्षों से समाज के लोग जाति प्रमाण पत्र के लिए आंदोलन कर रहे थे, जबकि इस संबंध में हाईकोर्ट के आदेश और प्रमाण पत्र निर्गत करने का आदेश भी पहले आ चुके थे,लेकिन प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहे थे।
    नागेंद्र ने इसका संपूर्ण श्रेय गोंड समाज के लोगो और संघर्ष समिति के संघर्ष का परिणाम है,कहा कि जब तक अंतिम पात्र अभ्यर्थी को सरल तरीके से जाति प्रमाण पत्र नहीं मिल जाता, तब तक समिति का संघर्ष जारी रहेगा।


    समाजवादी पार्टी के नेता सुशांत राज भारत ने क्या कहा

    बांसडीह तहसील से जो गोंड जाति कि जाति प्रमाण पत्र जारी हुआ है वो हाई कोर्ट के हस्तक्षेप से जारी हुआ है। क्योंकि माननीय हाई कोर्ट ने तहसीलदार से जवाब मांगा था। तहसीलदार महोदय खुद को घिरा हुआ महसूस कर रहे थे इसलिए वो कोर्ट जाने के पहले ही जाति प्रमाण पत्र जारी कर दिए क्योंकि जिन लोगों का प्रमाण पत्र जारी हुआ है वो परिवार कोर्ट गया था। 

    उन्होंने कहा कि बांसडीह की विधायक  और तहसीलदार को यह स्पष्ट कर देना चाहिए की क्या जो कोर्ट जाएगा उसी का जाति प्रमाण पत्र जारी होगा? कोर्ट जाने में 40 से 50 हजार खर्च लगता है तो क्या जिसको प्रमाण पत्र चाहिए वो पैसा और समय दोनों खर्च करे ? वैसे तो जाति प्रमाण पत्र जारी करने में 7-15 दिन तक लग जाते हैं पर बांसडीह में जो प्रमाण पत्र जारी हुआ वो सिर्फ 1-2 घंटे में जारी हो गया। ये कौन सा सिस्टम चल रहा है बांसडीह तहसील में ?

    तहसीलदार महोदय और वर्तमान विधायक को यह स्पष्ट करना चाहिए की क्या हर गरीब कमजोर गोंड जाति के लोगों का प्रमाण पत्र 1-2 घंटे में या 7-15 दिन में बिना किसी रूकावट जारी जारी हो जाएगा? जहां तक बात रही संघर्ष की तो विधायक जी सिर्फ एक दिन एक बैठक कर के क्रेडिट ले रही हैं जबकि गोंड जाति के लोग 100 दिन से ज्यादा बलिया जिलाधिकारी कार्यालय पर धरने पर थे। तब विधायक जी कहां थी ? अनेकों बार धरना प्रदर्शन हुआ तब विधायक जी कहां थीं ? सच्चाई यह है गोंड जाति के लोगों ने खुद ही संघर्ष किया है और उनका समर्थन हम जैसे लोग तथा छात्र संघ के बड़े नेताओं के साथ साथ अन्य सामाजिक संगठनों ने किया है। भाजपा में काम करने वाले गोंड जाति के लोग विधायक जी के इशारे पर नाचने वाले लोग हैं। उनके अंदर रीढ़ की हड्डी होती तो वो लोग कब का भाजपा का त्याग कर दिया होता क्योंकि जब सत्ता आपकी है तो फिर संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है ?