चंद्र ग्रहण 2026: चन्द्र ग्रहण प्रारंभ, ग्रहण काल में भोजन-जल से रहें दूर, करें भगवान का भजन - Ballia Breaking
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    चंद्र ग्रहण 2026: चन्द्र ग्रहण प्रारंभ, ग्रहण काल में भोजन-जल से रहें दूर, करें भगवान का भजन


    आज चंद्र ग्रहण पर करें ये खास उपाय, विद्वान पंडित सतेन्द्र पाण्डेय ने बताए सरल उपा

    आज 3:20 से चंद्र ग्रहण प्रारंभ है । चंद्र ग्रहण को लेकर धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों में विशेष उत्साह और श्रद्धा देखी जा रही है। विद्वान ज्योतिषाचार्य पंडित सतेन्द्र पाण्डेय ने ग्रहण काल में किए जाने वाले कुछ विशेष उपाय बताए हैं, जिन्हें अपनाकर व्यक्ति नकारात्मक प्रभावों से बच सकता है और पुण्य फल प्राप्त कर सकता है।

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    🔹 ग्रहण काल में करें ये उपाय

    1. मंत्र जाप और ध्यान

    ग्रहण के समय “ॐ सोमाय नमः” या “महामृत्युंजय मंत्र” का जाप करना अत्यंत शुभ माना गया है। इससे मानसिक शांति मिलती है और चंद्र दोष कम होता है।

    2. दान-पुण्य का महत्व

    ग्रहण समाप्ति के बाद गरीबों को चावल, सफेद वस्त्र, दूध, दही, चीनी आदि का दान करना लाभकारी बताया गया है। चंद्रमा से संबंधित वस्तुओं का दान विशेष फलदायी होता है।

    3. तुलसी और कुश का प्रयोग

    ग्रहण से पहले खाने-पीने की वस्तुओं में तुलसी पत्र या कुश डाल दें। इससे खाद्य पदार्थों की पवित्रता बनी रहती है।

    4. स्नान और शुद्धि

    ग्रहण समाप्त होने के बाद गंगाजल मिश्रित जल से स्नान करें और घर में भी गंगाजल का छिड़काव करें।

    5. गर्भवती महिलाएं रखें सावधानी

    ग्रहण काल में गर्भवती महिलाओं को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए और किसी नुकीली वस्तु का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

    🔹 क्या न करें

    ग्रहण के दौरान भोजन न करें।

    बाल कटवाना, नाखून काटना या शुभ कार्य करना टालें।

    मंदिर के कपाट ग्रहण काल में बंद रखें।

    पंडित सतेन्द्र पाण्डेय के अनुसार, श्रद्धा और सकारात्मक सोच के साथ किए गए ये उपाय जीवन में सुख-शांति और समृद्धि लाते हैं।

    👉 ग्रहण काल में भक्ति, संयम और सतर्कता ही सबसे बड़ा उपाय है।

    🙏 आज (3 मार्च 2026) का चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) के मुख्य समय और उपाय — भारत (IST) अनुसार

    📅 दिनांक: 3 मार्च 2026

    📍 समय (भारतीय मानक समय / IST)

    🔹 ग्रहण प्रारंभ: दोपहर 3:20 बजे 

    🔹 पूर्ण ग्रहण (Totality) शुरू: शाम 4:34 बजे 

    🔹 ग्रहण अधिकतम: लगभग शाम 5:00-5:04 बजे 

    🔹 पूर्ण ग्रहण समाप्त: शाम 5:33 बजे 

    🔹 ग्रहण पूरी तरह समाप्त: शाम 6:46-6:48 बजे तक 

    🔔 ध्यान दें — भारत के अधिकतर भागों में चाँद थोड़ा बाद में (लगभग 6:20-6:30 बजे) उगता है, इसलिए ग्रहण का केवल अंतिम भाग ही दिखेगा। 

    🌙 ग्रहण काल में भोजन और व्यवहार के लिए सुझाव

    🔹 भोजन से दूरी:

    ग्रहण चले (approx 3:20 PM से 6:48 PM तक) — इस समय खाना-पीना न करें। ग्रहण के दौरान खाना खाना और जल पीना धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वर्जित माना जाता है।

    🔹 जल का प्रयोग:

    ग्रहण अवधि में पानी, भोजन या मिले-जुले वस्तुओं को ग्रहण के प्रभाव से बचाने के लिए कुश या तुलसी का पत्ता खाने-पीने की चीजों में रखें — यह पारंपरिक उपाय माना जाता है।

    🔹 भगवान का भजन–ध्यान:

    ग्रहण काल में भगवान के नाम का उच्चारण, भजन, मंत्र जप और ध्यान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

    🔸 “ॐ सोमाय नमः”

    🔸 “ॐ नमः शिवाय”

    🔸 महामृत्युंजय मंत्र का जाप आदि।

    (ये धार्मिक सुझाव मान्यताओं पर आधारित हैं।)

    🙏 ग्रहण काल में क्या करें

    ✅ सुबह-शाम भगवान का ध्यान और भजन करें।

    ✅ मंत्र जप से मन शांत रखें।

    ✅ घर को गंगाजल या शुद्ध जल से छिड़कें।

    ✅ भोजन ग्रहण समाप्ति के बाद ग्रहण शुद्धि के बाद ग्रहण काल के बाद ग्रहण शुद्धि के साथ ही लें।

    ⚠️ ग्रहण काल में क्या न करें

    ❌ ग्रहण चलते समय भोजन न करें।

    ❌ नाखून या बाल न काटें।

    ❌ बर्तन नहीं धोएं (कुछ परंपराओं के अनुसार)।

    ❌ गर्भवती महिलाएँ ग्रहण काल में बाहर न निकलें।

    📿 अंत में: ग्रहण काल में भजन, पूजा, और सकारात्मक क्रियाएं करना ही सर्वोत्तम उपाय माना जाता है — श्रद्धा के साथ किया गया भजन मन को शांति देता है और नकारात्मक संदेह कम होता है।

    नोट - यह लेख धार्मिक मान्यताओं और कस्बे के विद्वान पंडित सत्येंद्र पाण्डेय द्वारा बताए गए विधियों के अनुसार लिखा गया है। कोई भी सुझाव/उपाय अपने स्वयं विवेक के आधार पर करें।