बलिया : बांसडीह के प्रथम विधायक की 38वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा कल, तैयारियां पूरी - Ballia Breaking
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    बलिया : बांसडीह के प्रथम विधायक की 38वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा कल, तैयारियां पूरी




    बांसडीह, बलिया। बांसडीह विधानसभा के प्रथम विधायक, नगर पंचायत बांसडीह के आजीवन चेयरमैन एवं बांसडीह इंटर कॉलेज के संस्थापक स्व. ठाकुर बैजनाथ सिंह की 38वीं पुण्यतिथि के अवसर पर 30 मार्च,दिन सोमवार को श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम बांसडीह इंटर कॉलेज के सभागार में प्रातः 11 बजे से शुरू होगा, जिसकी सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
    श्रद्धांजलि सभा में क्षेत्र के गणमान्य लोगों के साथ विद्यालय परिवार की भी उपस्थिति रहेगी। इस अवसर पर बांसडीह इंटर कॉलेज के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया जाएगा। आयोजन को लेकर विद्यालय प्रशासन एवं प्रबंध समिति द्वारा व्यापक स्तर पर तैयारियां की गई हैं। बता दे कि स्व. ठाकुर बैजनाथ सिंह बांसडीह विधानसभा के प्रथम विधायक रहे हैं और उन्होंने शिक्षा व समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनके द्वारा स्थापित बांसडीह इंटर कॉलेज आज भी क्षेत्र में शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए उनके पौत्र एवं बांसडीह नगर पंचायत के पूर्व चेयरमैन संजय कुमार सिंह ने बताया कि श्रद्धांजलि सभा को सादगीपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जाएगा।


    तीन बार विधायक एवं आजीवन चेयरमैन रहे ठाकुर बैजनाथ सिंह

    बांसडीह,बलिया। बांसडीह विधानसभा के प्रथम विधायक ठाकुर बैजनाथ सिंह का जन्म वर्ष 1909 में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा बांसडीह में ही हुई। इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए व एलएलबी की पढ़ाई पूरी की।
    ठाकुर बैजनाथ सिंह बांसडीह से तीन बार विधायक रहे और टाउन एरिया (नगर पंचायत) के आजीवन चेयरमैन भी रहे। आजादी के बाद वर्ष 1952 के पहले आम चुनाव में उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़कर अपने प्रतिद्वंदी रंजीत बहादुर (सोशलिस्ट पार्टी) को हराया और प्रथम विधायक बने। इसके बाद वर्ष 1957 में दूसरी बार निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधायक चुने गए, जबकि 1967 में जनसंघ के टिकट पर जीत दर्ज कर तीसरी बार विधायक बने।
    इसके अलावा वे टाउन एरिया बांसडीह के अध्यक्ष के रूप में वर्ष 1933 से 1953 तक तथा 1961 से 1971 तक कार्यरत रहे। उनका संपूर्ण जीवन गरीबों, मजदूरों और शोषितों की सेवा के लिए समर्पित रहा।
    शिक्षा के क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा। क्षेत्र के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उन्होंने बांसडीह इंटर कॉलेज की स्थापना की, जो आज भी शिक्षा का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।