बलिया : साइबर ठगों ने खाते से उड़ाए 30 हजार रुपये, जांच में जुटी पुलिस - Ballia Breaking
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    बलिया : साइबर ठगों ने खाते से उड़ाए 30 हजार रुपये, जांच में जुटी पुलिस

     


    बांसडीह (बलिया)। नगर पंचायत बांसडीह के बहादुरगंज वार्ड निवासी एक युवक के खाते से साइबर ठगों द्वारा तीन बार में 30 हजार रुपये उड़ाने के मामले में कोतवाली पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर जांच शुरू कर दी है। कोतवाल राकेश कुमार सिंह ने बताया कि मामले में इंडियन बैंक के शाखा प्रबंधक सुधीर त्रिपाठी और उनके सहयोगी मनीष ओझा से वार्ता कर जानकारी ली गई है। शाखा प्रबंधक ने पुलिस और पीड़ित को आश्वस्त किया है कि बैंक स्तर पर मामले की जांच की जा रही है तथा नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।उन्होंने बताया कि 90 दिनों के भीतर पीड़ित के खाते में धनराशि वापस आने की संभावना है। बैंक प्रबंधन के अनुसार साइबर ठगों ने आधार एनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AEPS) के जरिए खाते से रुपये निकाले और बाद में रकम को तीन बार अलग अलग खाताधारकों के खाते में ट्रांसफर किया गया है। 

    यह है पूरा मामला

    बहादुरगंज वार्ड नंबर 9 निवासी सुजीत कुमार गुप्ता पुत्र स्व. महेश प्रसाद ने पुलिस को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उनका यूनियन बैंक बांसडीह शाखा में खाता है। 13 मई की शाम करीब 7:35 बजे उनके मोबाइल पर खाते से 10 हजार रुपये निकाले जाने का मैसेज आया। इसके बाद उन्होंने 14 मई को बैंक में शिकायत कर कार्रवाई की मांग की, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पीड़ित के अनुसार 18 मई को सुबह करीब 11:51 बजे फिर दो बार में 10-10 हजार रुपये खाते से निकाल लिए गए। इस तरह कुल 30 हजार रुपये की साइबर ठगी हो गई। सुजीत कुमार गुप्ता ने आरोप लगाया कि कुछ महीने पहले बैंक कर्मियों द्वारा फोन कर उनके मोबाइल में एक ऐप डाउनलोड कराया गया था। उन्हें आशंका है कि उसी के जरिए साइबर अपराधियों ने उनके खाते से रुपये उड़ा दिए। पीड़ित ने पुलिस से संबंधित खातों को फ्रीज कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।


    बोले शाखा प्रबंधक ऐप पूरी तरह है सुरक्षित

    वहीं इस संबंध में इंडियन बैंक के शाखा प्रबंधक सौरभ त्रिपाठी ने मोबाइल ऐप के जरिए साइबर फ्रॉड होने की बात से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि बैंक कर्मियों द्वारा ग्राहकों को जो ऐप उपलब्ध कराया जाता है, वह खाताधारकों को डिजिटल रूप से बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने के लिए होता है और पूरी तरह सुरक्षित है।

    शाखा प्रबंधक ने बताया कि खाताधारक के खाते से AEPS तकनीक के जरिए धन निकाला गया है। मामले की जांच के लिए उच्च अधिकारियों को लिखित शिकायत भेज दी गई है। जांच की समय सीमा 90 दिन निर्धारित है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में साइबर फ्रॉड की पुष्टि होती है तो पीड़ित की धनराशि वापस दिलाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।

    पहली शिकायत पर कार्रवाई होती तो बच जाते 20 हजार रुपये

    पीड़ित सुजीत गुप्ता ने बैंक कर्मियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पहली बार 10 हजार रुपये की साइबर ठगी होने के अगले ही दिन उन्होंने बैंक को लिखित शिकायत देकर खाते को सुरक्षित करने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की थी। पीड़ित का आरोप है कि यदि बैंक द्वारा समय रहते नियम अनुसार कार्रवाई की गई होती तो बाद में हुए 20 हजार रुपये के साइबर फ्रॉड को रोका जा सकता था। उन्होंने कहा कि शुरुआती शिकायत के बावजूद बैंक स्तर पर गंभीरता नहीं दिखाई गई, जिसका खामियाजा उन्हें उठाना पड़ा।