बलिया : बांसडीह की धरती पर गूंजा शहीदों का जयघोष, सेनानी आश्रितों ने किया नमन
- 20 सदस्यीय सेनानी उत्तराधिकारी दल ने शहीद स्मारकों पर अर्पित किए श्रद्धासुमन
- भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारों से गूंजा नगर
बांसडीह, बलिया। अगस्त क्रांति दिवस की परंपरा के तहत मंगलवार को बांसडीह की धरती एक बार फिर स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास की यादों से सराबोर हो उठी। बलिया से बैरिया होते हुए स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं उत्तराधिकारी संगठन का करीब 20 सदस्यीय दल बांसडीह पहुंचा। दल के पहुंचने पर भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारों से नगर का वातावरण देशभक्ति से ओतप्रोत हो गया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के अध्यक्ष गंगा सागर सिंह के नेतृत्व में सेनानी उत्तराधिकारी एवं उनके परिवार के सदस्य कचहरी चौराहे पहुंचे। यहां प्रशासन की ओर से उपजिलाधिकारी डॉ. पुष्कर मिश्रा, तहसीलदार नितिन कुमार सिंह, प्रभारी निरीक्षक राकेश सिंह तथा सेनानी उत्तराधिकारी संगठन बांसडीह के अध्यक्ष प्रतुल कुमार ओझा ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया।
स्वागत के बाद दल ने सप्तर्षि द्वार स्थित शहीद स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर अमर सेनानियों को नमन किया। इसके बाद पैदल मार्च करते हुए शहीद पंडित रामदहीन ओझा की प्रतिमा स्थल पर पहुंचे और माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी।
सेनानी उत्तराधिकारियों ने कचहरी चौराहे स्थित सेनानी स्मारक, सप्तर्षि द्वार तथा बांसडीह डाकबंगला परिसर में स्थापित पंडित रामदहीन ओझा की प्रतिमा पर भी पुष्प अर्पित किए। कार्यक्रम के अंत में ब्लॉक परिसर स्थित सेनानी स्तंभ पर श्रद्धासुमन अर्पित कर स्वतंत्रता आंदोलन के सेनानियों को याद किया गया।
1942 की क्रांति को किया याद
संगठन के अध्यक्ष गंगा सागर सिंह ने कहा कि 18 अगस्त का दिन बलिया और देश के स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। बांसडीह की धरती ने वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि आजादी हमें सेनानियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान के कारण मिली है। उनके इतिहास और योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है।उन्होंने बांसडीह के प्रथम शहीद पंडित रामदहीन ओझा और वर्ष 1942 में गजाधर शर्मा के तहसीलदार बनने का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े स्थानीय इतिहास को संरक्षित करना आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम” के नारों से वातावरण गूंजता रहा। सेनानी उत्तराधिकारियों ने स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास और शहीदों के बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर द्विजेंद्र कुमार मिश्र, बिनय पांडेय, बंशरोपन पांडेय, बासदेव ठाकुर, संतोष शुक्ल, डॉ. विनोद, जैनेन्द्र पांडेय मिंटू, सागर सिंह राहुल, कौशल सिंह, अभिषेक मिश्र मिंटू, मुनजी गोंड, शिवम गुप्ता और राजेश प्रजापति सहित सेनानी उत्तराधिकारी एवं क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे। संचालन प्रतुल कुमार ओझा ने किया।
