पूर्व मंत्री रामगोविंद चौधरी का निधन, बलिया की राजनीति में शोक
लखनऊ पीजीआई में रात 10:15 बजे ली अंतिम सांस, आठ बार रहे विधायक और 2017 में बने थे नेता प्रतिपक्ष
बलिया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी का शुक्रवार रात करीब 10:15 बजे लखनऊ स्थित पीजीआई में उपचार के दौरान निधन हो गया। उनके निधन की खबर से बलिया समेत पूरे प्रदेश में शोक की लहर दौड़ गई। सपा के नवागत जिलाध्यक्ष सुनील कुमार मौर्य ने निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि वह लखनऊ के लिए रवाना हो रहे हैं।रामगोविंद चौधरी का नाम बलिया की राजनीति के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की विधानसभा की राजनीति में लंबे समय तक प्रमुखता से जुड़ा रहा। छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले चौधरी ने कई दशकों तक विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया। वह कुल आठ बार विधायक रहे। वर्ष 2017 में उन्हें उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी मिली।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ था सफर
रामगोविंद चौधरी के राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से हुई थी। बलिया के मुरली मनोहर टाउन महाविद्यालय में पढ़ाई के दौरान वह छात्रसंघ की राजनीति से जुड़े। इसके बाद जयप्रकाश नारायण के आंदोलन में भी सक्रिय रहे। आपातकाल के दौरान उन्हें जेल जाना पड़ा था। राजनीति में आने से पहले वह अधिवक्ता के रूप में भी कार्यरत रहे। उनकी राजनीति पर समाजवादी विचारधारा का गहरा प्रभाव रहा। जयप्रकाश नारायण और चंद्रशेखर जैसे समाजवादी नेताओं से उनके राजनीतिक संबंध रहे। उपलब्ध विवरणों में वह पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को अपना राजनीतिक गुरु बताते रहे हैं।
1977 में पहली बार बने विधायक
रामगोविंद चौधरी ने वर्ष 1977 में चिलकहर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया। इसके बाद 1980, 1985, 1989 और 1991 में भी चिलकहर से विधायक चुने गए। बाद के वर्षों में उन्होंने बांसडीह विधानसभा क्षेत्र से अपनी राजनीतिक पारी आगे बढ़ाई। विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में उनके आठ बार निर्वाचित सदस्य रहने का उल्लेख है।
मुलायम और अखिलेश सरकार में संभाली मंत्री पद की जिम्मेदारी
वर्ष 2003 से 2007 तक मुलायम सिंह यादव के मंत्रिमंडल में रामगोविंद चौधरी मंत्री रहे। इसके बाद अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सरकार में भी उन्हें महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने बांसडीह सीट से सपा प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की और अखिलेश यादव सरकार में मंत्री बने।
विधानसभा के रिकॉर्ड के अनुसार मार्च 2012 से मार्च 2017 तक वह अखिलेश यादव मंत्रिमंडल का हिस्सा रहे। इस दौरान उन्होंने सरकार में महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली।
2017 में बने नेता प्रतिपक्ष
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने रामगोविंद चौधरी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सौंपी। विधानसभा की आधिकारिक सूची में 27 मार्च 2017 से उनका नाम नेता प्रतिपक्ष के रूप में दर्ज है। नेता प्रतिपक्ष के रूप में उन्होंने विधानसभा में विपक्ष की भूमिका निभाई। विधानसभा रिकॉर्ड के अनुसार उनके नाम से 943 प्रश्न और 50 चर्चाएं दर्ज हैं।
2022 में बांसडीह से मिली चुनावी हार
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में रामगोविंद चौधरी ने बांसडीह विधानसभा सीट से एक बार फिर सपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा। इस चुनाव में भाजपा-निषाद पार्टी गठबंधन की प्रत्याशी केतकी सिंह ने उन्हें पराजित किया। इसके साथ ही बांसडीह विधानसभा क्षेत्र में पहली बार भाजपा का खाता खुला और लंबे समय से क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले रामगोविंद चौधरी को चुनावी हार का सामना करना पड़ा।
रामगोविंद चौधरी के निधन से बलिया की राजनीति में एक लंबे राजनीतिक अध्याय का अंत हो गया। उनके निधन पर राजनीतिक दलों के नेताओं, जनप्रतिनिधियों, अधिवक्ताओं और समर्थकों ने शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि दी।
