बलिया : सील दंत चिकित्सालय को तीन माह बाद स्वास्थ्य विभाग ने खोला, मकान मालिक ने फिर जड़ा ताला
- डीएम के यहां शिकायत के बाद सीएमओ के आदेश पर जांच के बाद 12 जून को हुई थी सीलिंग, अब सील खोलने की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
बांसडीह, बलिया। नगर पंचायत बांसडीह के बड़ी बाजार स्थित बिना लाइसेंस संचालित किए जा रहे दंत चिकित्सालय को स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा करीब तीन माह पहले सील किए जाने के बाद गुरुवार को उसी चिकित्सालय की सील खोलकर संचालक को दुकान की चाबी सौंपने का मामला चर्चा में आ गया। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अरविंद कुमार चौधरी दंत चिकित्सालय संचालक डा. कमलेश कुमार प्रसाद उर्फ केके प्रसाद के साथ मौके पर पहुंचे और पूर्व में लगाई गई सील को खोल दिया। इसके बाद चिकित्सालय संचालक को दुकान की चाबी सौंप दी गई। मामले की जानकारी मकान मालिक को होने पर उन्होंने मौके पर पहुंचकर दुकान पर अपना ताला जड़ दिया और उसे फिर बंद कर दिया।
फ़ोटो - दुकान का सील तोड़ता चिकित्सक
यह था पूरा मामला
जानकारी के अनुसार स्थानीय निवासी केशव प्रसाद गुप्ता ने बड़ी बाजार स्थित दंत चिकित्सालय के अवैध संचालन को लेकर जिलाधिकारी को पत्र देकर शिकायत दर्ज कराई थी। जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने मामले की जांच कराई। शिकायत में बिना आवश्यक लाइसेंस एवं योग्यता के दंत चिकित्सालय संचालित किए जाने का आरोप लगाया गया था।
जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से तीन सदस्यीय टीम गठित की गई थी। टीम की जांच आख्या के बाद बीते 12 जून को डा. योगेंद्र दास, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी/अधीक्षक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बांसडीह तथा जिला प्रशासनिक अधिकारी डा. योगेश पांडेय सहित अधिकारियों की टीम ने बड़ी बाजार स्थित दंत चिकित्सालय को सील कर दिया था। सीलिंग की कार्रवाई के बाद मामला कुछ समय तक शांत रहा।
इसके बाद पांच अगस्त को मकान मालिक शंकर जी अग्रवाल ने भी मुख्य चिकित्सा अधिकारी को शपथपत्र देकर दुकान को खाली कराकर कब्जा दिलाने की मांग की थी। शपथपत्र में उन्होंने बताया था कि कमलेश कुमार प्रसाद उनकी दुकान में दंत चिकित्सालय संचालित करते थे। उन्होंने स्वयं को वैद्य डॉक्टर बताया था, लेकिन बाद में जानकारी हुई कि दंत चिकित्सालय चलाने के लिए उनके पास आवश्यक योग्यता और लाइसेंस नहीं है। मकान मालिक के अनुसार चिकित्सक के साथ उनके द्वारा कोई लिखित किरायानामा अथवा एग्रीमेंट भी नहीं किया गया था। उन्होंने दुकान में रखे सामान को हटवाकर दुकान अपने कब्जे में दिलाने की मांग की थी।
मामले में मकान मालिक के पत्र का संज्ञान लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने 27 अगस्त को पत्र जारी कर डा. अरविंद कुमार, डा. आनंद कुमार और डा. अभिषेक मिश्रा की तीन सदस्यीय टीम गठित करते हुए प्रकरण की जांच कर आख्या मांगी थी। इसके बाद गुरुवार दोपहर अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. अरविंद कुमार चौधरी आरोपित चिकित्सक के साथ शंकर जी अग्रवाल के कटरे में पहुंचे। स्वास्थ्य विभाग की मौजूदगी में पूर्व में लगाई गई सील खोल दी गई और चिकित्सक को दुकान की चाबी सौंप दी गई।
सील खोले जाने की जानकारी मिलते ही मकान मालिक मौके पर पहुंच गए। उन्होंने दुकान पर अपना ताला लगाकर उसे दोबारा बंद कर दिया। इस दौरान मौके पर काफी देर तक लोगों की भीड़ जुटी रही। बताया गया कि इसी आपाधापी में चिकित्सालय संचालक डा. केके प्रसाद सील खुलने के बाद वहां से एक बैग सहित कुछ दस्तावेज लेकर निकल गए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस दंत चिकित्सालय को स्वास्थ्य विभाग ने जांच के बाद बिना आवश्यक प्रपत्र एवं लाइसेंस के संचालित पाए जाने पर सील किया था, उसे करीब तीन माह बाद किस आधार पर खोला गया। वहीं, चिकित्सालय संचालक के विरुद्ध पूर्व में की गई कार्रवाई और जांच के बाद अब तक क्या निर्णय लिया गया, यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है। सील खोलने की कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।
लोगों का कहना है कि यदि चिकित्सालय का संचालन अवैध था तो सील खोलने का आधार क्या रहा और यदि दुकान केवल मकान मालिक के शपथपत्र के आधार पर खुलवाई गई, तो इसकी प्रक्रिया और आदेश स्पष्ट किया जाना चाहिए। फिलहाल मकान मालिक द्वारा दोबारा दुकान पर ताला लगाए जाने के बाद मामला एक बार फिर गरमा गया है।
सीएमओ बोले—चिकित्सालय अवैध, वैधानिक कार्रवाई जारी
इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी बलिया ने बताया कि मकान मालिक के शपथपत्र के आधार पर दुकान की सील हटाने के निर्देश दिए गए थे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना वैध प्रपत्र एवं आवश्यक लाइसेंस के चिकित्सक और उनके द्वारा संचालित दंत चिकित्सालय को वैध नहीं माना जा सकता और मामले में वैधानिक कार्रवाई जारी है।
फिलहाल इस पूरे प्रकरण में स्वास्थ्य विभाग द्वारा पहले दंत चिकित्सालय को सील किया जाना, मकान मालिक के शपथपत्र के बाद जांच टीम गठित होना और फिर सील खोले जाने की कार्रवाई कई सवाल खड़े कर रही है। क्षेत्र में पूरे मामले को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।

