बलिया : इस महाविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन,पहले दिन अमेरिका-ईरान संघर्ष से भारत समेत दक्षिण-पूर्व एशिया पर पड़ने वाले प्रभाव पर मंथन
- दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 22 और 23 सितंबर को स्नातकोत्तर महाविद्यालय बांसडीह में किया जा रहा है।
बांसडीह (बलिया)। स्नातकोत्तर महाविद्यालय बांसडीह में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), नई दिल्ली के प्रायोजन में मंगलवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। ‘युद्ध, व्यापार और समाज का आकलन : अमेरिका-ईरान संघर्ष का भारत सहित दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों पर सामाजिक एवं आर्थिक प्रभाव’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए विद्वानों ने युद्ध, वैश्विक व्यापार, ऊर्जा संकट, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर विस्तार से विचार रखे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया के कुलपति प्रो. नरेंद्र कुमार शुक्ल सहित मंचासीन अतिथियों ने मां सरस्वती के पूजन के साथ किया। बीएलएड की छात्राओं निक्की तिवारी एवं सहयोगियों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। निक्की तिवारी और गरिमा उपाध्याय ने राष्ट्रीय गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद निक्की तिवारी, अमरेश यादव, जियाउल हक, अंशिका एवं गरिमा उपाध्याय ने महाविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत किया। निक्की तिवारी, नंदिता सिंह एवं सहयोगियों ने स्वागत गीत से अतिथियों का स्वागत किया।
महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ. विनोद कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन किया। श्री सत्येंद्र कुमार पांडेय ने मंचासीन अतिथियों का परिचय कराया और महाविद्यालय के इतिहास पर प्रकाश डाला। श्री हर्ष कुमार सिंह ने विषय प्रवर्तन करते हुए अमेरिका-ईरान संघर्ष, विभिन्न देशों की भूमिका, होर्मुज जलडमरूमध्य तथा ICSSR-NRC से जुड़े विषयों पर चर्चा की।
ऊर्जा संकट और विकसित भारत पर भी हुई चर्चा
मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में पहुंचीं बांसडीह विधायक केतकी सिंह ने अमेरिका-ईरान संघर्ष और उसके संभावित प्रभावों पर अपने विचार रखे। उन्होंने ऊर्जा संकट, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका, सौर ऊर्जा तथा वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़े विषयों पर चर्चा की।
प्रो. शांतेश कुमार सिंह (SIS, जेएनयू, नई दिल्ली) ने कहा कि स्वयं में सुधार ही राष्ट्र की सुरक्षा का आधार है। उन्होंने युद्ध के नियमों, मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष, राष्ट्रीय एवं मानव सुरक्षा, ट्रेड वार, अमेरिका के विभिन्न देशों पर प्रभाव और भारतीय व्यापार पर पड़ने वाले प्रभावों पर विचार रखे। उन्होंने विभिन्न देशों में महंगाई की स्थिति पर भी चर्चा की।
प्रो. हरिशरण शर्मा (दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय) ने अमेरिका की भूमिका, भारत-चीन संबंध और ईरान-अमेरिका संघर्ष के विभिन्न पहलुओं पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने जियो-पॉलिटिक्स के साथ सड़क एवं व्यापारिक मार्गों के महत्व तथा संघर्ष के व्यापक प्रभावों पर चर्चा की।
होर्मुज जलडमरूमध्य और ऊर्जा व्यवस्था पर मंथन
प्रो. दीपक कुमार (समाजशास्त्र विभाग, मगध विश्वविद्यालय, बोधगया) ने अमेरिका-ईरान संघर्ष से उत्पन्न वैश्विक संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य के महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने युद्ध के विभिन्न क्षेत्रों पर पड़ने वाले व्यावहारिक प्रभावों के उदाहरण देते हुए ऊर्जा सुरक्षा की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने ‘डिक्लाइनिंग पावर’, ‘वर्ल्ड पावर’, सौर ऊर्जा और आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था जैसे विषयों को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रत्येक संगोष्ठी का उद्देश्य नई चेतना पैदा करना होना चाहिए।
शिक्षा के क्षेत्र में नए पाठ्यक्रमों पर जोर
अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. नरेंद्र कुमार शुक्ल ने अमेरिका-ईरान संघर्ष सहित वैश्विक संकटों के समाधान के लिए संवाद, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन के लिए महाविद्यालय परिवार को बधाई दी।
कुलपति ने शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। उन्होंने महाविद्यालय में अगले सत्र से बीटेक और एमटेक जैसे तकनीकी पाठ्यक्रम शुरू करने की दिशा में प्रयास किए जाने की बात कही।
कार्यक्रम के अंत में महाविद्यालय के प्राचार्य एवं संगोष्ठी संयोजक डॉ. फिरोज खान ने अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया और उद्घाटन सत्र के समापन की घोषणा की।

